Babhruvāhana’s Lament and Appeal for Expiation (प्रायश्चित्त-याचना)
जानाम्यहमिदं युद्ध त्वया मद्वचनात् कृतम् । स्त्रीणामागमने हेतुमहमिच्छामि वेदितुम्,“मैं तो इतना ही जानता हूँ कि तुमने मेरे कहनेसे यह युद्ध किया है; परंतु यहाँ स्त्रियोंके आनेका क्या कारण है? यह मैं जानना चाहता हूँ
jānāmy aham idaṁ yuddhaṁ tvayā madvacanāt kṛtam | strīṇām āgamane hetum aham icchāmi veditum |
Вайшампаяна сказал: «Я понимаю лишь одно: ты вступил в эту битву по моему слову. Но я желаю знать, по какой причине сюда пришли женщины.»
वैशमग्पायन उवाच