उत्तङ्कोपाख्यानम् — Maṇi-Kuṇḍala Retrieval and Entry into Nāgaloka
Chapter 57
राजोवाच षष्ठे काले ममाहारो विहितो द्विजसत्तम । न शक््यस्त्वं समुत्स्रष्ठं क्षुधितेन मयाद्य वै,राजाने कहा--द्धिजश्रेष्ठ। दिनके छठे भागमें मेरे लिये आहारका विधान किया गया है। यह वही समय है। मैं भूखसे पीड़ित हो रहा हूँ। इसलिये मेरे हाथोंसे तुम छूट नहीं सकते
Царь сказал: «О лучший из брахманов, в шестую часть дня мне предписана трапеза. Вот и настал этот час. Меня мучит голод; потому сегодня ты не сможешь вырваться из моих рук».
उत्तड़क उवाच