Brahma-vidyā: Satya–Tapas and the Enumeration of Tattvas
Arjuna–Vāsudeva framed dialogue
वायुदेव उवाच अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । संवादं मोक्षसंयुक्त शिष्यस्य गुरुणा सह,भगवान् श्रीकृष्णने कहा--अर्जुन इस विषयको लेकर गुरु और शिणष्यमें जो मोक्षविषयक संवाद हुआ था, वह प्राचीन इतिहास बतलाया जा रहा है। एक दिन उत्तम व्रतका पालन करनेवाले एक ब्रह्मवेत्ता आचार्य अपने आसनपर विराजमान थे। परंतप! उस समय किसी बुद्धिमान् शिष्यने उनके पास जाकर निवेदन किया--'भगवन्! मैं कल्याणमार्ममें प्रवृत्त होकर आपकी शरणमें आया हूँ और आपके चरणोंमें मस्तक झुकाकर याचना करता हूँ कि मैं जो कुछ पूछूँ; उसका उत्तर दीजिये। मैं जानना चाहता हूँ कि श्रेय क्या है?”
vāyudeva uvāca | atrāpy udāharantīmam itihāsaṁ purātanam | saṁvādaṁ mokṣasaṁyuktaṁ śiṣyasya guruṇā saha ||
Ваюдева сказал: «И здесь приводят древнее предание — старинный рассказ: беседу о освобождении (мокше), состоявшуюся между учеником и учителем.»
वायुदेव उवाच