Arjuna’s request to Krishna and the opening of the Kāśyapa–Brāhmaṇa mokṣa discourse (Āśvamedhika-parva 16)
वैशम्पायन उवाच कृष्णेन सहित: पार्थ: स्वं राज्यं प्राप्प केवलम् । तस्यां सभायां दिव्यायां विजहार मुदा युत:,वैशम्पायनजीने कहा--राजन्! श्रीकृष्णके सहित अर्जुनने जब केवल अपने राज्यपर पूरा अधिकार प्राप्त कर लिया, तब वे उस दिव्य सभाभवनमें आनन्दपूर्वक रहने लगे
Вайшампаяна сказал: «О царь, Арджуна, пребывая вместе с Кришной, обрёл полную власть над своим царством. В той божественной зале они предавались радостному отдыху».
वैशम्पायन उवाच