धृतराष्ट्रस्य वनप्रस्थानम् — Dhṛtarāṣṭra’s Departure for Forest Life
सहदेवस्तु राजानं प्रणिपत्येदमब्रवीत् । अहो मे भवतो दृष्ट॑ हृदयं गमनं प्रति,उस समय सहदेवने राजा युधिष्ठिरको प्रणाम करके कहा--'भैया, मुझे ऐसा दिखायी देता है कि आपका हृदय तपोवनमें जानेके लिये उत्सुक है--यह बड़े हर्षकी बात है
sahadevastu rājānaṃ praṇipatyedam abravīt | aho me bhavato dṛṣṭaṃ hṛdayaṃ gamanaṃ prati ||
Тогда Сахадева, поклонившись царю Юдхиштхире, сказал: «О брат! Мне ясно видно: твоё сердце стремится к уходу в лес подвижничества; это — великая радость».
वैशम्पायन उवाच