Ādi Parva, Adhyāya 85: Āṣṭaka–Yayāti संवादः
Merit-Exhaustion, Rebirth, and the Critique of Pride
त्वं यदो प्रतिपद्यस्व पाप्मानं जरया सह । यौवनेन त्वदीयेन चरेयं विषयानहम्,यदो! तुम बुढ़ापेके साथ मेरे दोषको ले लो और मैं तुम्हारी जवानीके द्वारा विषयोंका उपभोग करूँ। एक हजार वर्ष पूरे होनेपर मैं पुनः तुम्हारी जवानी देकर बुढ़ापेके साथ अपना दोष वापस ले लूँगा
«Яду, возьми на себя старость вместе с моей “скверной”; а я твоей юностью буду наслаждаться предметами чувств.»
वैशम्पायन उवाच