आदि पर्व — अध्याय ८३: ययाति-इन्द्र-संवादः तथा अष्टक-प्रश्नः
Yayāti–Indra Dialogue and Aṣṭaka’s Inquiry
ययातिरुवाच राज्यभाक् स भवेद् ब्रद्मन् पुण्यभाक् कीर्तिभाक् तथा | यो मे दद्यात् वय: पुत्रस्तद् भवाननुमन्यताम्,ययाति बोले--ब्रह्मन्! मेरा जो पुत्र अपनी युवावस्था मुझे दे, वही पुण्य और कीर्तिका भागी होनेके साथ ही मेरे राज्यका भी भागी हो। आप इसका अनुमोदन करें
Яяти сказал: «О брахман! Тот сын, кто отдаст мне свою юность, будет причастен и к заслуге, и к славе, и также получит долю в моём царстве. Да будет на то твоё согласие».
शुक्र उवाच