ययातेर्वानप्रस्थतपःस्वर्गारोहणम् | Yayāti’s Vānaprastha Austerities and Ascent to Heaven
देवयान्युवाच केनास्यर्थेन नृपते इमं देशमुपागत: । जिधघृक्षुर्वारिजं किंचिदथवा मृगलिप्सया,देवयानीने पूछा--महाराज! आप किस कार्यसे वनके इस प्रदेशमें आये हैं? आप जल अथवा कमल लेना चाहते हैं या शिकारकी इच्छासे ही आये हैं?
devayāny uvāca kenāsyārthena nṛpate imaṁ deśam upāgataḥ | jighṛkṣur vārijaṁ kiñcid athavā mṛga-lipsayā ||
Деваяни сказала: «О царь, с какой целью ты пришёл в эту часть леса? Ты пришёл набрать воды или сорвать лотос, или же тебя привело желание охоты?»
वैशम्पायन उवाच