Yayāti’s Abdication and Pūru’s Coronation (ययाति-पूोरु-राज्याभिषेकः)
शर्मिष्ठोवाच अहं दासीसहस्त्रेण दासी ते परिचारिका । अनु त्वां तत्र यास्यामि यत्र दास्यति ते पिता,शर्मिष्ठा बोली--देवयानी! मैं एक सहस्र दासियोंके साथ तुम्हारी दासी बनकर सेवा करूँगी और तुम्हारे पिता जहाँ भी तुम्हारा ब्याह करेंगे, वहाँ तुम्हारे साथ चलूँगी
Шармишṭха сказала: «О Деваяни, я стану твоей служанкой и буду прислуживать тебе вместе с тысячей служанок. И куда бы отец ни выдал тебя замуж, туда я последую за тобой.»
वैशम्पायन उवाच