Cyavana’s Birth and Bhṛgu’s Curse upon Agni (च्यवनजन्म तथा अग्निशापः)
भूगुरुवाच केनासि रक्षसे तस्मै कथिता त्वं जिहीर्षते । नहिवत्वां वेद तद् रक्षो मद्भार्या चारहासिनीम्,भगु बोले--कल्याणी! तुम्हें हर लेनेकी इच्छासे आये हुए उस राक्षसको किसने तुम्हारा परिचय दे दिया? मनोहर मुसकानवाली मेरी पत्नी तुझ पुलोमाको वह राक्षस नहीं जानता था
Бхригу сказал: «О благонравная! Кто открыл тому ракшасу, пришедшему с намерением похитить тебя, кто ты? Ведь тот демон не знал тебя — Пулому, мою жену с чарующей улыбкой».
शौनक उवाच