Ādi-parva Adhyāya 3 — Janamejaya’s Rite, Dhaumya’s Parīkṣā, and Uttanka’s Kuṇḍala Quest (सर्पसत्रप्रस्तावना–गुरुपरीक्षा–उत्तङ्कोपाख्यान)
स एवमुक्तः प्रत्युवाच--एतत् प्रत्यनुनये भवन्तावश्विनौ नोत्सहेडहमनिवेद्य गुरवे5पूपमुपयोक्तुमिति,उनके ऐसा कहनेपर उपमन्युने उत्तर दिया--'इसके लिये तो आप दोनों अश्विनीकुमारोंकी मैं बड़ी अनुनय-विनय करता हूँ। गुरुजीके निवेदन किये बिना मैं इस पूएको नहीं खा सकता”
Услышав это, Упаманью ответил: «В этом я смиренно умоляю вас, о Ашвины: я не могу съесть эту pūpa, не уведомив прежде своего учителя».
राम उवाच