और्वोपाख्यानम्
Aurva Episode: Restoration of Sight and Restraint of World-Destructive Anger
अनिवार्यमसम्बाधं तव वाचा कथं वयम् | न स्पृशेम यथाकामं पुण्यं भागीरथीजलम्,जिसे कोई रोक नहीं सकता, जहाँ पहुँचनेमें कोई बाधा नहीं है, भागीरथीके उस पावन जलका तुम्हारे कहनेसे हम अपने इच्छानुसार स्पर्श क्यों न करें?
«Если её нельзя удержать и к ней нет преград, то почему по твоему слову мы не должны по своей воле прикоснуться к святой воде Бхагиратхи?»
अजुन उवाच