आर्जुन–गन्धर्वसंवादः
Arjuna–Gandharva Dialogue on Honor, Night-Power, and Purohita-Nīti
धर्मतो<हं परित्याज्या युवयोर्नात्र संशय: । त्यक्तव्यां मां परित्यज्य त्राहि सर्व मयैकया,“इसमें संदेह नहीं कि एक-न-एक दिन आप दोनोंको धर्मतः मेरा परित्याग करना पड़ेगा। जब मैं त्याज्य ही हूँ, तब आज ही मुझे त्यागकर मुझ अकेलीके द्वारा इस समूचे कुलकी रक्षा कर लीजिये
«Нет сомнения: однажды, по закону дхармы, вам обоим придётся оставить меня. Если мне суждено быть оставленной, то оставьте меня уже сегодня; и мною одной спасите и сохраните весь этот род.»
वैशम्पायन उवाच