एकचक्रानिवासप्रस्तावः | Ekacakrā Sojourn—Vyāsa’s Consolation and Directive
यथा च तन्न पश्येरन् परीक्षन्तोडपि पाण्डवा: । आग्नेयमिति तत् कार्यमपि चान्येडपि मानवा:,“उस घरके चारों ओर सन, तेल, घी, लाह और लकड़ी आदि सब वस्तुएँ संग्रह करके रखना। अच्छी तरह देखभाल करनेपर भी पाण्डवों तथा दूसरे लोगोंको भी इस बातकी शंका न हो कि यह घर आग भड़कानेवाले पदार्थोंसे बना है, इस तरह पूरी सावधानीके साथ उस राजभवनका निर्माण कराना चाहिये। इस प्रकार महल बन जानेपर जब पाण्डव वहाँ जाये, तब उन्हें तथा सुहृदोंसहित कुन्तीदेवीको भी बड़े आदर-सत्कारके साथ उसीमें रखना
yathā ca tan na paśyeran parīkṣantop(i) pāṇḍavāḥ | āgneyam iti tat kāryam api cāny(e) ’pi mānavāḥ ||
Вайшампаяна сказал: «Устройте так, чтобы, даже если Пандавы тщательно осмотрят, они не распознали его как “сделанное для огня”, и чтобы другие люди тоже не заподозрили. Дворец следует возвести с совершенной осторожностью.»
वैशम्पायन उवाच