Vāraṇāvatāgamana: Public Farewell, Vidura’s Coded Counsel, and Departure
इतरे त्वथ सम्मूढास्तत्र तत्र प्रपेदिरे । तंतु दृष्टवा क्रियोपेतं द्रोणोडमन्यत पाण्डवम्,परंतु दूसरे राजकुमार हक््के-बक्के-से होकर अपने-अपने स्थानपर ही खड़े रह गये। अर्जुनको तत्काल कार्यमें तत्पर देख द्रोणाचार्यने उन्हें अपने सब शिष्योंसे बढ़कर माना और उस समय वे उनपर बहुत प्रसन्न हुए। अर्जुनके बाणोंसे ग्राहके टुकड़े-टुकड़े हो गये और वह महात्मा द्रोणकी पिंडली छोड़कर मर गया। तब द्रोणाचार्यने महारथी महात्मा अर्जुनसे कहा--
itare tv atha sammūḍhās tatra tatra prapedire | taṃtu dṛṣṭvā kriyopetaṃ droṇo ’manyata pāṇḍavam ||
Вайшампаяна сказал: прочие же стояли в оцепенении, каждый оставаясь на своём месте. Увидев, как Пандава (Арджуна) тотчас приступил к делу — решительно и умело, — Дрона признал его лучшим из всех учеников и в тот миг был им весьма доволен.
वैशम्पायन उवाच