Āstravidyā-Pradarśana: The Kuru Princes’ Public Demonstration of Arms (आस्त्रविद्या-प्रदर्शनम्)
प्रिया बभूवुस्तासां च तथैव मुनियोषिताम् । कुन्तीमथ पुन: पाण्डुर्माद्रयर्थे समचोदयत्,वे सभी महान् धैर्यशाली, अधिक वीर्यवान, महाबली और पराक्रमी थे। उन देवस्वरूप महान् तेजस्वी पुत्रोंकोी देखकर महाराज पाण्डुको बड़ी प्रसन्नता हुई। वे आनन्दमें मग्न हो गये। वे सभी बालक शतशुंगनिवासी समस्त मुनियों और मुनिपत्नियोंके प्रिय थे। तदनन्तर पाण्डुने माद्रीसे संतानकी उत्पत्ति करानेके लिये कुन्तीको पुनः प्रेरित किया
priyā babhūvus tāsāṁ ca tathaiva muniyoṣitām | kuntīm atha punaḥ pāṇḍur mādryarthe samacodayat ||
Вайшампаяна сказал: Те сыновья стали дороги мудрецам-риши и так же — женам риши. Затем царь Панду вновь побудил Кунти — на этот раз ради Мадри, — чтобы было получено потомство.
वैशम्पायन उवाच