Āṇīmāṇḍavya–Upākhyāna
The Account of Āṇīmāṇḍavya and the Birth of Vidura
जातमात्रैव मे देया वराय वरवर्णिनी । ह्ृदि कामस्तु मे कश्नचित् त॑ं निबोध जनेश्वर,'जनेश्वर! जबसे इस सुन्दरी कनन््याका जन्म हुआ है, तभीसे मेरे मनमें यह चिन्ता है कि इसका किसी श्रेष्ठ वरके साथ विवाह करना चाहिये; किंतु मेरे हृदयमें एक अभिलाषा है, उसे सुन लीजिये
Дашараджа сказал: «С самого её рождения в моём сердце жила забота: эту прекрасную деву следует отдать достойному жениху. Но есть у меня в груди одно желание — внемли ему, о владыка людей».
वैशम्पायन उवाच