अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
उपाख्यानैर्विना तावद् भारतं प्रोच्यते बुधैः । ततो<प्यर्धशतं भूय: संक्षेपं कृतवानृषि:,तदनन्तर व्यासजीने उपाख्यानभागको छोड़कर चौबीस हजार श्लोकोंकी भारतसंहिता बनायी; जिसे विद्वान् पुरुष भारत कहते हैं। इसके पश्चात् महर्षिने पुनः पर्वसहित ग्रन्थमें वर्णित वृत्तान्तोंकी अनुक्रमणिका (सूची)-का एक संक्षिप्त अध्याय बनाया, जिसमें केवल डेढ़ सौ श्लोक हैं। व्यासजीने सबसे पहले अपने पुत्र शुकदेवजीको इस महाभारत-ग्रन्थका अध्ययन कराया
upākhyānair vinā tāvad bhārataṃ procyate budhaiḥ | tato 'py ardhaśataṃ bhūyaḥ saṃkṣepaṃ kṛtavān ṛṣiḥ ||
Мудрые говорят, что сочинение, называемое «Бхарата», сперва произносится без побочных сказаний (upākhyāna). Затем риши вновь составил еще более краткое изложение — в сто пятьдесят шлок — служащее указателем событий, описанных в книге вместе с ее разделами (parvan).