Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
तत् तथेति ततो देवी मधुरं प्रत्यभाषत,भविता च विवादोऊत्र तव तेषां च धर्मतः । तब सावित्रीदेवीने मधुर वाणीमें “तथास्तु” कहा। इसके बाद देवीने ब्राह्मणका प्रिय करनेकी इच्छासे यह दूसरा वचन और कहा--:विप्रवर! जहाँ दूसरे श्रेष्ठ ब्राह्मण गये हैं, उन स्वर्गादि निम्नश्रेणीके लोकोंमें तुम नहीं जाओगे। तुम्हें स््वभावसिद्ध एवं निर्दोष ब्रह्मपदकी प्राप्ति होगी। तुमने मुझसे जो यहाँ प्रार्थना की है, वह पूरी होगी। मैं उसे पूर्ण करनेकी चेष्टा करूँगी। तुम नियमपूर्वक एकाग्रचित्त होकर जप करो। धर्म स्वयं तुम्हारी सेवामें उपस्थित होगा। काल, मृत्यु और यम भी तुम्हारे निकट पधारेंगे, तुम्हारा उन सबके साथ यहाँ धर्मानुकूल वाद-विवाद भी होगा
tat tatheti tato devī madhuraṁ pratyabhāṣata | bhavitā ca vivādo 'tra tava teṣāṁ ca dharmataḥ ||
Então a deusa respondeu docemente: “Assim seja.” E acrescentou: “Aqui, de acordo com o dharma, surgirá um debate entre ti e eles.”
भीष्म उवाच