अध्याय १७८ — प्राणवायुगतिः तथा शारीराग्निव्यवस्था
Adhyāya 178 — The courses of prāṇa-vāyu and the regulation of the bodily fire
एतां बुद्धिं समास्थाय मड़्किरनिर्वेदमागतः । सर्वान् कामान् परित्यज्य प्राप्य ब्रह्म महत्सुखम्,राजन! इसी बुद्धिका आश्रय लेकर मड़कि धन और भोगोंसे विरक्त हो गये और समस्त कामनाओंका परित्याग करके उन्होंने परमानन्दस्वरूप परब्रह्मको प्राप्त कर लिया
“Amparando-se nessa compreensão, Maḍki chegou ao desapego e ao desencanto com as riquezas e os gozos. Renunciando a todos os desejos, alcançou Brahman, a grande bem-aventurança. Ó rei!”
भीष्म उवाच