शूरलक्षणवर्णनम् | Marks and Typologies of Martial Temperament
उग्रस्वरा मन्युमन्तो युद्धेष्वारावसारिण: । अधर्मज्ञावलिप्ताश्ष घोरा रौद्रप्रदर्शना:,जिनके केशोंके अग्रभाग पीले और छितराये हुए हैं, पसलियाँ, ठोड़ी और मुँह लंबे एवं मोटे हैं, कंधे ऊँचे, गर्दन मोटी और पिण्डली भारी हैं, जो देखनेमें विकट जान पढ़ते हैं, सुग्रीव जातिवाले अश्वोंके समान तथा गरुड़ पक्षीकी भाँति उद्धृत स्वभावके हैं, जिनके सिर गोल और मुख विशाल हैं, जो बिलाव-जैसा मुख धारण करते हैं तथा जिनके स्वरमें कठोरता है, वे बड़े क्रोधी होते हैं और युद्धमें गर्जना करते हुए विचरते हैं। उन्हें धर्मका ज्ञान नहीं होता। वे घमंडमें भरे हुए घोर आकृतिवाले दिखायी देते हैं। उनका दर्शन ही बड़ा भयंकर है
ugrasvarā manyumanto yuddheṣv ārāvasāriṇaḥ | adharmajñāvaliptāś ca ghorā raudrapradarśanāḥ ||
Disse Bhīṣma: “Alguns têm voz áspera e estão cheios de ira; na batalha vagueiam rugindo. Ignoram o dharma e incham de orgulho—sombrios de figura, exibem um ânimo feroz e violento. A própria aparência deles é aterradora.”
भीष्म उवाच