ममाज्ञया द्विजश्रेष्ठ द्रोणपुत्रोडभिषिच्यताम् । सैनापत्येन भद्रं ते मम चेदिच्छसि प्रियम्,महाराज! प्रजानाथ! तब आपके पुत्रने उनसे कहा--'द्विजश्रेष्ठी] आपका कल्याण हो। यदि आप मेरा प्रिय करना चाहते हैं तो मेरी आज्ञासे द्रोणपुत्रका सेनापतिके पदपर अभिषेक कीजिये
“Ó melhor entre os brâmanes, por minha ordem seja consagrado o filho de Droṇa como comandante do exército; que haja bem para ti, se desejas fazer o que me é caro.”
संजय उवाच