सर्वोपायैहिं नेष्यामि प्रेतराजनिवेशनम् । अनुज्ञां तु महाराज भवान् मे दातुमरहति,'प्रभो! मैं सत्यकी शपथ खाकर जो कह रहा हूँ, मेरी इस बातको सुनो। मैं अपने इष्ट, आपूर्त, दान, धर्म तथा अन्य शुभ कर्मोकी शपथ खाकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि आज श्रीकृष्णके देखते-देखते सम्पूर्ण पांचालोंको सभी उपायोंद्वारा यमराजके लोकमें भेज दूँगा। महाराज! इसके लिये तुम मुझे आज्ञा दे दो”
sarvopāyaiḥ hi neṣyāmi pretarājaniveśanam | anujñāṃ tu mahārāja bhavān me dātum arhati ||
Sañjaya disse: “Por todos os meios eu os enviarei à morada do Senhor dos Mortos. Mas, ó grande rei, deves conceder-me tua permissão.”
संजय उवाच