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Shloka 21

आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः

Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition

नग्नजिन्नाम राजासीद्‌ भुवि विख्यातविक्रम: । एकचक्र इति ख्यात आसीद्‌ू यस्तु महासुर:,अयःशिरा, अश्वशिरा, वीर्यवान्‌ अयः:शंकु, गगनमूर्धा और वेगवान--राजन्‌! ये पाँच पराक्रमी महादैत्य केकय देशके प्रधान-प्रधान महात्मा राजाओंके रूपमें उत्पन्न हुए। उनसे भिन्न केतुमान्‌ नामसे प्रसिद्ध प्रतापी महान्‌ असुर अमितौजा नामसे विख्यात राजा हुआ, जो भयानक कर्म करनेवाला था। स्वर्भानु नामवाला जो श्रीसम्पन्न महान्‌ असुर था, वही भयंकर कर्म करनेवाला राजा उग्रसेन कहलाया। अश्व नामसे विख्यात जो श्रीसम्पन्न महान्‌ असुर था, वही किसीसे परास्त न होनेवाला महापराक्रमी राजा अशोक हुआ। राजन! उसका छोटा भाई जो अश्वपति नामक दैत्य था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ हार्दिक्य नामवाला राजा हुआ। वृषपर्वा नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान्‌ महादैत्य था, वह पृथ्वीपर दीर्घप्रज्ञ नामक राजा हुआ। राजन! वृषपर्वाका छोटा भाई जो अजक था, वही इस भूमण्डलमें शाल्व नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। अश्वग्रीव नामवाला जो धैर्यवान्‌ महादैत्य था, वह पृथ्वीपर रोचमान नामसे विख्यात राजा हुआ। राजन! बुद्धिमान्‌ और यशस्वी सूक्ष्म नामसे प्रसिद्ध जो दैत्य कहा गया है, वह इस पृथ्वीपर बृहद्रथ नामसे विख्यात राजा हुआ है। असूुरोंमें श्रेष्ठ जो तुहुण्ड नामक दैत्य था, वही यहाँ सेनाबिन्दु नामसे विख्यात राजा हुआ। असुरोंके समाजमें जो सबसे अधिक बलवान था, वह इषुपाद नामक दैत्य इस पृथ्वीपर विख्यात पराक्रमी नग्नजित्‌ नामक राजा हुआ। एकचक्र नामसे प्रसिद्ध जो महान्‌ असुर था, वही इस पृथ्वीपर प्रतिविन्ध्य नामसे विख्यात राजा हुआ। विचित्र युद्ध करनेवाला महादैत्य विरूपाक्ष इस पृथ्वीपर चित्रधर्मा नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। शत्रुओंका संहार करनेवाला जो वीर दानवश्रेष्ठ हर था, वही सुबाहु नामक श्रीसम्पन्न राजा हुआ। शत्रुपक्षका विनाश करनेवाला महातेजस्वी अहर इस भूमण्डलमें बाह्लिक नामसे विख्यात राजा हुआ। चन्द्रमाके समान सुन्दर मुखवाला जो असुरश्रेष्ठ निचन्द्र था, वही मुंजकेश नामसे विख्यात श्रीसम्पन्न राजा हुआ। परम बुद्धिमान्‌ निकुम्भ जो युद्धमें अजेय था, वह इस भूमिपर भूपालोंमें श्रेष्ठ देवाधिप कहलाया। दैत्योंमें जो शरभ नामसे प्रसिद्ध महान्‌ असुर था, वही मनुष्योंमें श्रेष्ठ राजर्षि पौरव हुआ। राजन! महापराक्रमी महान्‌ असुर कुपट ही इस पृथ्वीपर राजा सुपार्श्वके रूपमें उत्पन्न हुआ। महाराज! महादैत्य क्रथ इस पृथ्वीपर राजर्षि पार्वतेयके नामसे उत्पन्न हुआ, उसका शरीर मेरु पर्वतके समान विशाल था। असुरोंमें शलभ नामसे प्रसिद्ध जो दूसरा दैत्य था, वह बाह्लीकवंशी राजा प्रह्मद हुआ। दैत्यश्रेष्ठ चन्द्र इस लोकमें चन्द्रमाके समान सुन्दर और चन्द्रवर्मा नामसे विख्यात काम्बोज देशका राजा हुआ। अर्क नामसे विख्यात जो दानवोंका सरदार था, वही नरपतियोंमें श्रेष्ठ राजर्षि ऋषिक हुआ। नृपशिरोमणे! मृतपा नामसे प्रसिद्ध जो श्रेष्ठ असुर था, उसे पश्चिम अनूप देशका राजा समझो। गविष्ठ नामसे प्रसिद्ध जो महातेजस्वी असुर था, वही इस पृथ्वीपर द्रुमसेन नामक राजा हुआ। मयूर नामसे प्रसिद्ध जो श्रीमान्‌ एवं महान्‌ असुर था, वही विश्व नामसे विख्यात राजा हुआ। मयूरका छोटा भाई सुपर्ण ही भूमण्डलमें कालकीर्ति नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। दैत्योंमें जो चन्द्रहन्ता नामसे प्रसिद्ध श्रेष्ठ असुर कहा गया है, वही मनुष्योंका स्वामी राजर्षि शुनक हुआ। इसी प्रकार जो चन्द्रविनाशन नामक महान्‌ असुर बताया गया है, वही जानकि नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ। कुरुश्रेष्ठ जनमेजय! दीर्घजिह्न नामसे प्रसिद्ध दानवराज ही इस पृथ्वीपर काशिराजके नामसे विख्यात था। सिंहिकाने सूर्य और चन्द्रमाका मान मर्दन करनेवाले जिस राहु नामक ग्रहको जन्म दिया था, वही यहाँ क्राथ नामसे प्रसिद्ध राजा हुआ

Vaiśampāyana uvāca |

Nagnajit-nāmā rājāsīd bhuvi vikhyāta-vikramaḥ |

Ekacakra iti khyāta āsīd yas tu mahāsuraḥ ||

Vaiśampāyana disse: “Na terra houve um rei chamado Nagnajit, célebre por seu valor. E o grande Asura conhecido como Ekacakra nasceu aqui (no mundo humano) como um rei celebrado por esse mesmo nome. Nesta passagem, a narrativa apresenta certos reis poderosos como encarnações ou manifestações de Asuras—sugerindo que uma força extraordinária, quando não é governada pelo dharma, pode tornar-se fonte de temor e desordem no mundo.”

नग्नजित्Nagnajit (name of a king)
नग्नजित्:
Karta
TypeNoun
Rootनग्नजित् (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Nominative, Singular
नामby name / named
नाम:
Karma
TypeNoun
Rootनामन् (प्रातिपदिक)
FormNeuter, Accusative, Singular
राजाking
राजा:
Karta
TypeNoun
Rootराजन् (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Nominative, Singular
आसीत्was
आसीत्:
TypeVerb
Rootअस् (धातु)
FormImperfect (लङ्), 3rd, Singular
भुविon earth
भुवि:
Adhikarana
TypeNoun
Rootभू (प्रातिपदिक: भुव्/भू)
FormFeminine, Locative, Singular
विख्यात-विक्रमःwhose prowess was renowned
विख्यात-विक्रमः:
TypeAdjective
Rootविख्यातविक्रम (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Nominative, Singular
एकचक्रःEkacakra (name)
एकचक्रः:
Karta
TypeNoun
Rootएकचक्र (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Nominative, Singular
इतिthus
इति:
TypeIndeclinable
Rootइति
ख्यातःknown, famed
ख्यातः:
TypeAdjective
Rootख्यात (कृदन्त, क्त)
FormMasculine, Nominative, Singular
आसीत्was
आसीत्:
TypeVerb
Rootअस् (धातु)
FormImperfect (लङ्), 3rd, Singular
यःwho
यः:
Karta
TypeNoun
Rootयद् (सर्वनाम-प्रातिपदिक)
FormMasculine, Nominative, Singular
तुindeed/but
तु:
TypeIndeclinable
Rootतु
महासुरःgreat asura/demon
महासुरः:
Karta
TypeNoun
Rootमहासुर (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Nominative, Singular

वैशम्पायन उवाच

V
Vaiśampāyana
N
Nagnajit
E
Ekacakra
B
Bhūmi (earth)

Educational Q&A

The passage implies that mere strength and fame are ethically ambiguous: great power may arise from Asuric origins and, without dharma, can threaten social order. It cautions readers to judge rulers not only by valor but by righteous conduct.

Vaiśampāyana is listing rulers on earth and identifying some of them as Asuras who took birth as kings. In this verse he names King Nagnajit as famous for valor and notes that the great Asura called Ekacakra is known in the human realm under that name.