भीमस्य जलान्वेषणं तथा वनविश्रान्तिः
Bhīma’s Search for Water and the Forest Halt
अभिवाद्य ततो द्रोणं रथानारुरुहुस्तदा । युधिष्ठिरं निवार्याशु मा युध्यस्वेति पाण्डवम्,उस समय बालकसे लेकर बूढ़ेतक सभी पुरवासी कौरवोंका सामना कर रहे थे। जनमेजय! गुप्तचरोंके मुखसे यह समाचार सुनकर कि वहाँ तुमुल युद्ध हो रहा है, कौरव वहाँ नहींके बराबर हो गये हैं, पंचालराज ट्रुपदके बाणोंसे कर्णके सम्पूर्ण अंग क्षत-विक्षत हो गये, वह भयभीत हो रथसे कूदकर भाग चला है तथा कौरव-सैनिक चीखते-चिल्लाते और कराहते हुए हम पाण्डवोंकी ओर भागते आ रहे हैं; पाण्डवलोग पीड़ित सैनिकोंका रोमांचकारी आर्तनाद कानमें पड़ते ही आचार्य द्रोणको प्रणाम करके रथोंपर जा बैठे और शीघ्र वहाँसे चल दिये। अर्जुनने पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरको यह कहकर रोक दिया कि “आप युद्ध न कीजिये”
abhivādya tato droṇaṃ rathān āruruhus tadā | yudhiṣṭhiraṃ nivāryāśu mā yudhyasveti pāṇḍavam ||
Então, após saudarem respeitosamente Droṇa, montaram depressa em seus carros. Arjuna logo conteve Yudhiṣṭhira, filho de Pāṇḍu, dizendo: “Não combatas.”
वैशम्पायन उवाच