Arjuna’s Approach, Drona’s Recognition, and the Turning of the Cattle (अर्जुनागमनम्, द्रोणवाक्यम्, गोगमनिवृत्तिः)
तमग्निमिव दुर्धर्षमसिशक्तिशरेन्धनम् | पाण्डवाग्निमहं दीप्तं प्रदहन्तमिवाहितम्,जो अग्निकी भाँति दुर्धर्ष है, खड़ग, शक्ति और बाणरूपी ईंधनसे प्रज्वलित है और अपने शत्रुको भस्म कर रही है, उस अर्जुनरूपी जलती हुई आगको आज मैं महामेघ बनकर बुझा दूँगा। मेरे अश्वोंका वेग ही पुरवैया हवाका काम करेगा। रथसमूहकी घर्घराहट ही बादलोंकी गम्भीर गर्जनगा होगी और बाणोंकी धारा ही जलधाराका काम करेगी
tam agnim iva durdharṣam asi-śakti-śarendhanam | pāṇḍavāgnim ahaṃ dīptaṃ pradahantam ivāhitam ||
ਜੋ ਅੱਗ ਵਾਂਗ ਅਦਮ੍ਯ ਹੈ, ਤਲਵਾਰ, ਸ਼ਕਤੀ ਅਤੇ ਤੀਰ-ਰੂਪੀ ਇੰਧਨ ਨਾਲ ਭੜਕਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਵੈਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸਾੜਨ ਲਈ ਤਤਪਰ ਹੈ—ਉਸ ਦਹਕਦੇ ਪਾਂਡਵ-ਅਗਨਿ (ਅਰਜੁਨ) ਨੂੰ ਅੱਜ ਮੈਂ ਬੁਝਾ ਦਿਆਂਗਾ।
कर्ण उवाच