Adhyāya 227: Duryodhana’s Deliberation and the Ghoṣa-yātrā Pretext
Dvaita-vana
त्रैलोक्यं संनिगृह्ास्मांस्त्वां च शक्र महाबल । मार्कण्डेयजी कहते हैं--राजन! उस समय स्कन्दके जन्म और बल-पराक्रमका समाचार सुनकर सब देवताओंने एकत्र हो इन्द्रसे कहा--'देवेश्वर! स्कन्दका बल असहा है। शीघ्र उन्हें मार डालिये; विलम्ब न कीजिये। महाबली इन्द्र! यदि आप इन्हें अभी नहीं मारते हैं तो ये त्रिलोकीको, हम सबको तथा आपको भी अपने वशमें करके “देवेन्द्र” बन बैठेंगे!
trailokyaṁ saṁnigṛhṇāsmāṁs tvāṁ ca śakra mahābala |
ਮਾਰਕੰਡੇਯ ਨੇ ਆਖਿਆ— “ਹੇ ਮਹਾਬਲੀ ਸ਼ਕ੍ਰ! ਜੇ ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਨਾ ਰੋਕਿਆ ਗਿਆ, ਤਾਂ ਉਹ ਤ੍ਰਿਲੋਕ— ਸਾਨੂੰ ਸਭ ਨੂੰ ਅਤੇ ਤੈਨੂੰ ਵੀ— ਵੱਸ ਵਿੱਚ ਕਰ ਕੇ ‘ਦੇਵੇਂਦਰ’ ਬਣ ਬੈਠੇਗਾ।”
मार्कण्डेय उवाच