इन्द्रद्युम्नोपाख्यानम्
Indradyumna Upākhyāna: On Kīrti, Smṛti, and Restoration
अपने कुलका आचार्य भी यदि निर्धन हो तो उसे निरन्तर शिष्योंकी डाँट-फटकार सुननी पड़ेगी। मित्र, सम्बन्धी या भाई-बन्धु धनके लालचसे ही अपने पास रहेंगे ।। अभाव: सर्वभूतानां युगान्ते सम्भविष्यति । दिश: प्रज्वलिता: सर्वा नक्षत्राण्यप्रभाणि च,युगान्तकाल आनेपर समस्त प्राणियोंका अभाव हो जायगा। सारी दिशाएँ प्रज्वलित हो उठेंगी और नक्षत्रोंकी प्रभा विलुप्त हो जायगी
abhāvaḥ sarvabhūtānāṃ yugānte sambhaviṣyati | diśaḥ prajvalitāḥ sarvā nakṣatrāṇy aprabhāṇi ca ||
ਯੁਗਾਂਤ ਵੇਲੇ ਸਭ ਜੀਵਾਂ ਉੱਤੇ ਅਭਾਵ ਆ ਪਵੇਗਾ। ਸਾਰੀਆਂ ਦਿਸ਼ਾਵਾਂ ਅੱਗ ਵਾਂਗ ਭੜਕ ਉਠਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਤਾਰਿਆਂ ਦੀ ਚਮਕ ਲੁਪਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ।
मार्कण्डेय उवाच