Kubera’s Arrival and the Disclosure of Agastya’s Curse
Vaiśaṃpāyana–Janamejaya Narrative
एवमुक्तस्ततो भीम: सृक्किणी परिसंलिहन् । स्मयमान इव क्रोधात् साक्षात् कालान्तकोपम:,राक्षसके ऐसा कहनेपर भीमसेन अपने मुखके दोनों कोने चाटते हुए कुछ मुसकराते-से प्रतीत हुए फिर क्रोधसे साक्षात् काल और यमराजके समान जान पड़ने लगे। रोषसे उनकी आँखें लाल हो गयी थीं “खड़ा रह,” खड़ा रह कहते हुए ताल ठोंककर राक्षसकी ओर दृष्टि गड़ाये उसपर टूट पड़े। राक्षस भी उस समय भीमसेनको युद्धके लिये उपस्थित देख बार- बार मुँह फैलाकर मुँहके दोनों कोने चाटने लगा और जैसे बलिराजा वज्रधारी इन्द्रपर आक्रमण करता है, उसी प्रकार कुपित हो उसने भीमसेनपर धावा किया
evam uktas tato bhīmaḥ sṛkkiṇī pari-saṁlihan | smayamāna iva krodhāt sākṣāt kālāntakopamaḥ ||
ਰਾਖਸ਼ ਦੇ ਇਉਂ ਕਹਿਣ ਤੇ ਭੀਮ ਨੇ ਮੂੰਹ ਦੇ ਦੋਵੇਂ ਕੋਨੇ ਚਾਟੇ; ਇਕ ਪਲ ਨੂੰ ਜਿਵੇਂ ਮੁਸਕਰਾਇਆ ਹੋਵੇ, ਪਰ ਅਗਲੇ ਹੀ ਪਲ ਕ੍ਰੋਧ ਨਾਲ ਉਹ ਸਾਕਸ਼ਾਤ ਕਾਲਾਂਤਕ ਵਰਗਾ ਦਿਸਣ ਲੱਗਾ।
वैशम्पायन उवाच