कृष्णेन विदुरं प्रति आगमन-हेतु-निवेदनम् / Krishna explains the purpose of his coming to Vidura
तेषां समुपविष्टानां सर्वेषां पापचेतसाम् । तव मध्यावतरणं मम कृष्ण न रोचते,“श्रीकृष्ण! वे सभी पापपूर्ण विचार लेकर बैठे हुए हैं; अत: उनके बीचमें आपका जाना मुझे अच्छा नहीं लगता है। वे सब-के-सब दुर्बुद्धि, अशिष्ट और दुष्टचित्त हैं। उनकी संख्या भी बहुत है। श्रीकृष्ण! आप उनके बीचमें जाकर कोई प्रतिकूल बात कहें, यह मुझे ठीक नहीं जान पड़ता
teṣāṁ samupaviṣṭānāṁ sarveṣāṁ pāpacetasām | tava madhyāvataraṇaṁ mama kṛṣṇa na rocate |
ਹੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ! ਜਦੋਂ ਉਹ ਸਾਰੇ ਪਾਪ-ਚਿੱਤ ਵਾਲੇ ਲੋਕ ਇਕੱਠੇ ਬੈਠੇ ਹੋਣ, ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਤੁਹਾਡਾ ਉਤਰ ਕੇ ਜਾਣਾ ਮੈਨੂੰ ਚੰਗਾ ਨਹੀਂ ਲੱਗਦਾ।
वैशम्पायन उवाच