अम्बोपाख्याने तापसानां विचारः तथा होत्रवाहनस्य उपदेशः
Ambā among ascetics; Hotravāhana directs her to Paraśurāma
सा तमासाद्य राजानं शाल्वं वचनमत्रवीत् | आगताहं महाबाहो त्वामुद्दिश्य महामते,आज्ञा पाकर राजकन्या अम्बा वृद्ध ब्राह्मणोंके संरक्षणमें रहकर शाल्वराजके नगरकी ओर गयी। उसके साथ उसकी धाय भी थी। उस मार्गको लाँचधचकर वह राजाके यहाँ पहुँच गयी और शाल्वराजसे मिलकर इस प्रकार बोली--“महाबाहो! महामते! मैं तुम्हारे पास ही आयी हूँ
sā tam āsādya rājānaṃ śālvaṃ vacanam abravīt | āgatāhaṃ mahābāho tvām uddiśya mahāmate ||
ਉਹ ਸ਼ਾਲਵ ਰਾਜੇ ਕੋਲ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਬੋਲੀ— “ਮਹਾਬਾਹੋ! ਮਹਾਮਤੇ! ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਹੀ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਕੇ ਇੱਥੇ ਆਈ ਹਾਂ।”
भीष्म उवाच