Ulūka’s Provocation and Keśava’s Counter-Message (उलूकदूत्ये केशवप्रत्युत्तरम्)
युष्माभिरपि कर्तव्यं वचनं मम नित्यश: । तपसास्मि परिश्रान्तो दृढे नियममास्थित:,“तुम्हें भी प्रतिदिन मेरी एक आज्ञाका पालन करना होगा। मैं तपस्या करते-करते बहुत थक गया हूँ और दृढ़तापूर्वक संयम-नियमके पालनमें लगा रहता हूँ। बहुत सोचनेपर भी मुझे अपने भीतर चलने-फिरनेकी कोई शक्ति नहीं दिखायी देती; अतः तात! तुम्हें सदा मुझे यहाँसे नदीके तटतक पहुँचाना पड़ेगा
yuṣmābhir api kartavyaṃ vacanaṃ mama nityaśaḥ | tapasāsmī pariśrānto dṛḍhe niyamam āsthitaḥ |
ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਮੇਰਾ ਹੁਕਮ ਮੰਨਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਤਪੱਸਿਆ ਨਾਲ ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਥੱਕ ਗਿਆ ਹਾਂ, ਫਿਰ ਵੀ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ ਨਿਯਮ-ਸੰਯਮ ਵਿੱਚ ਟਿਕਿਆ ਹਾਂ।
संजय उवाच