Udyoga-parva Adhyāya 130: Kuntī’s Instruction on Rājadharma and Daṇḍanīti
एको<5हमिति यन्मोहान्मन्यसे मां सुयोधन । परिभूय सुद्दुर्बुद्धे ग्रहीतुं मां चिकीर्षसि,वैशम्पायनजी कहते हैं-जनमेजय! विदुरजीके ऐसा कहनेपर शत्रुसमूहका संहार करनेवाले शक्तिशाली श्रीकृष्णने धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधनसे इस प्रकार कहा--:दुर्बुद्धि दुर्योधन! तू मोहवश जो मुझे अकेला मान रहा है और इसलिये मेरा तिरस्कार करके जो मुझे पकड़ना चाहता है, यह तेरा अज्ञान है
eko 'ham iti yan mohān manyase māṁ suyodhana | paribhūya sudurbuddhe grahītuṁ māṁ cikīrṣasi ||
“ਹੇ ਸੁਯੋਧਨ! ਮੋਹ ਵਿੱਚ ਤੂੰ ਸੋਚਦਾ ਹੈਂ—‘ਇਹ ਇਕੱਲਾ ਹੈ’। ਅਤੇ ਹੇ ਅਤਿ ਦੁਰਬੁੱਧੀ! ਮੈਨੂੰ ਤਿਰਸਕਾਰ ਕੇ ਫੜਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈਂ—ਇਹ ਤੇਰੀ ਬੁੱਧੀ ਦੀ ਅੰਨ੍ਹਤਾ ਹੈ।”
वैशम्पायन उवाच