Chapter 23: Śakuni Reports, Kaurava Advance, and Arjuna’s Penetration of the Host
संहारे सर्वतो जाते पृथिव्यां शोकसम्भवे । बद्दीनामुत्तमस्त्रीणां सीमन्तोद्धरणे तथा,माननीय नरेश! जब सब ओरसे वह मर्यादाशून्य युद्ध होने लगा, आपके और शत्रुपक्षके योद्धा मारे जाने लगे, युद्धपरायण वीरोंकी गर्जना और श्रेष्ठ शंखोंकी ध्वनि होने लगी, धनुर्धरोंकी ललकार, सिंहनाद और गर्जनाओंके साथ जब वह युद्ध औचित्यकी सीमाको पार कर गया, योद्धाओंके मर्मस्थल विदीर्ण किये जाने लगे, विजयाभिलाषी योद्धा इधर-उधर दौड़ने लगे, रणभूमिमें सब ओर शोकजनक संहार होने लगा, बहुत-सी सुन्दरी स्त्रियोंके सीमन्तके सिन्दूर मिटाये जाने लगे तथा सारी मर्यादाओंको तोड़कर अत्यन्त भयंकर महायुद्ध चलने लगा, उस समय विनाशकी सूचना देनेवाले अति दारुण उत्पात प्रकट होने लगे
saṃhāre sarvato jāte pṛthivyāṃ śokasambhave | baddhīnām uttamastrīṇāṃ sīmanto-ddharaṇe tathā ||
ਸੰਜਯ ਬੋਲਿਆ—ਜਦੋਂ ਧਰਤੀ ਉੱਤੇ ਹਰ ਪਾਸੇ ਸੋਗ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਸੰਹਾਰ ਹੋਇਆ, ਅਤੇ ਅਨੇਕ ਉੱਤਮ ਇਸਤ੍ਰੀਆਂ ਦੇ ਸੁਹਾਗ-ਚਿੰਨ੍ਹ (ਸੀਮੰਤ) ਮਿਟਣ ਲੱਗੇ, ਤਦੋਂ ਵਿਨਾਸ਼ ਦੀ ਸੂਚਨਾ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਭਿਆਨਕ ਅਪਸ਼ਕੁਨ ਪ੍ਰਗਟ ਹੋਏ।
संजय उवाच