Nakula–Śakuni Duel and the Night Battle; Śikhaṇḍin–Kṛpa Engagement (नकुल-शकुनियुद्धं तथा रात्रियुद्धवर्णनम्)
गतप्रत्यागताक्षेपै: पातनोत्थानसम्प्लुतै: । युयुधाते महात्मानौ कुरुसात्वतपुड्वौ,जैसे दो हाथी दाँतोंके अग्रभागसे तथा दो साँड़ सीगोंसे लड़ते हैं, उसी प्रकार वे दोनों वीर कभी भुजपाशोंसे बाँधकर, कभी सिरोंकी टक्कर लगाकर, कभी पैरोंसे खींचकर, कभी पैरमें पैर लपेटकर, कभी तोमर-प्रहारके समान ताल ठोंककर, कभी अंकुश गड़ानेके समान एक-दूसरेको नोचकर, कभी पादबन्ध, उदरबन्ध, उद्भ्रमणःर, गतः, प्रत्यागतः॑, आक्षेपर%ँ, पातनः, उत्थान और संप्लुत* आदि दावोंका प्रदर्शन करते हुए वे दोनों महामनस्वी कुरु और सात्वतवंशके प्रमुख वीर परस्पर युद्ध कर रहे थे
sañjaya uvāca | gatapratyāgatākṣepaiḥ pātanotthānasamplutaiḥ | yuyudhāte mahātmānau kuru-sātvata-puṅgavau ||
ਅੱਗੇ-ਪਿੱਛੇ ਵਧਣ, ਆਖੇਪ ਕਰਨ, ਡਾਹੁਣ-ਉੱਠਣ ਅਤੇ ਛਾਲਾਂ ਵਰਗੀਆਂ ਮੱਲ-ਚਾਲਾਂ ਦਿਖਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਕੁਰੂਆਂ ਅਤੇ ਸਾਤ੍ਵਤਾਂ ਦੇ ਉਹ ਦੋਵੇਂ ਮਹਾਤਮਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਵੀਰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਯੁੱਧ ਕਰ ਰਹੇ ਸਨ।
संजय उवाच