Duryodhana’s Anxiety, Bhīṣma’s Reassurance, and Renewed Mobilization (दुर्योधनचिन्ता–भीष्मप्रत्याश्वासन–सेनानिर्गमनम्)
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १६ “लोक मिलाकर कुल ३६ ३ “लोक हैं।] #-+>ोी श््नु हि कमी त्रिसप्ततितमो< ध्याय: विराट-भीष्म, अभ्रृत्थामा-अर्जुन, दुर्योधन-भीमसेन तथा अभिमन्यु और लक्ष्मणके द्वन्द्-युद्ध संजय उवाच विराटो<थ त्रिभिर्बाणैर्भीष्ममार्च्छन्महारथम् । विव्याध तुरगांश्वास्य त्रिभिर्बाणैर्महारथ:,संजय कहते हैं--राजन्! महारथी राजा विराटने तीन बाण मारकर महारथी भीष्मको पीड़ित किया और तीन ही बाणोंसे उनके घोड़ोंको भी घायल कर दिया
sañjaya uvāca | virāṭo 'tha tribhir bāṇair bhīṣmam ārcchan mahāratham | vivyādha turagāṁś cāsya tribhir bāṇair mahārathaḥ ||
ਸੰਜਯ ਬੋਲਿਆ—ਰਾਜਨ! ਤਦ ਮਹਾਰਥੀ ਰਾਜਾ ਵਿਰਾਟ ਨੇ ਤਿੰਨ ਤੀਰਾਂ ਨਾਲ ਮਹਾਰਥੀ ਭੀਸ਼ਮ ਨੂੰ ਵਿੱਧ ਕੇ ਪੀੜਾ ਦਿੱਤੀ ਅਤੇ ਹੋਰ ਤਿੰਨ ਤੀਰਾਂ ਨਾਲ ਉਸ ਦੇ ਘੋੜਿਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਜਖ਼ਮੀ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।
संजय उवाच