आदि पर्व — द्रौपदी-स्वयंवरानन्तरवृत्तम्
Aftermath of Draupadī’s Svayaṃvara
भागीरथो बृहत्क्षत्र: सैन्धवश्न जयद्रथ: । बृहद्रथो बाह्लिकश्न श्रुतायुश्न महारथ:,भगीरथवंशी बृहत्क्षत्र, सिन्धुराज जयद्रथ, बृहद्रथ, बाह्नलीक, महारथी श्रुतायु, उलूक, राजा कैतव, चित्रांगद, शुभांगद, बुद्धिमान् वत्सराज, कोसलनरेश, पराक्रमी शिशुपाल तथा जरासंध--ये तथा और भी अनेक जनपदोंके शासक भूमण्डलमें विख्यात बहुत-से क्षत्रिय वीर तुम्हारे लिये यहाँ पधारे हैं। भद्रे! ये पराक्रमी नरेश तुम्हें पानेके उद्देश्यसे इस उत्तम लक्ष्यका भेदन करेंगे। शुभे! जो इस निशानेको वेध डाले, उसीका आज तुम वरण करना
dhṛṣṭadyumna uvāca | bhāgīratho bṛhatkṣatraḥ saindhavaś ca jayadrathaḥ | bṛhadratho bāhlikaś ca śrutāyuś ca mahārathaḥ |
ਧ੍ਰਿਸ਼ਟਦ੍ਯੁਮਨ ਨੇ ਆਖਿਆ—ਭਾਗੀਰਥ, ਬ੍ਰਿਹਤਕ੍ਸ਼ਤ੍ਰ, ਸਿੰਧੂ ਦਾ ਰਾਜਾ ਜਯਦ੍ਰਥ, ਬ੍ਰਿਹਦ੍ਰਥ, ਬਾਹਲੀਕ ਅਤੇ ਮਹਾਰਥੀ ਸ਼੍ਰੁਤਾਯੁ—ਇਹ ਸਭ ਇੱਥੇ ਆਏ ਹਨ।
धृष्टह्युम्न उवाच