पाण्डवस्य तु शीघ्रास्त्रं मघवा प्रत्यपूजयत् । गन्धर्वाप्सरसश्रैव ये च तत्र समागता:,पाण्डुनन्दनके शीघ्रतापूर्वक अस्त्र-संचालनके लिये इन्द्रने उनकी बड़ी प्रशंसा की। उनके सिवा वहाँ जो गन्धर्व और अप्सराएँ आयी थीं, उन्होंने भी उनकी बड़ी सराहना की
ପାଣ୍ଡବଙ୍କ ଶୀଘ୍ରାସ୍ତ୍ର-ପ୍ରୟୋଗକୁ ମଘବା (ଇନ୍ଦ୍ର) ପ୍ରଶଂସା କଲେ। ସେଠାରେ ସମାଗତ ଗନ୍ଧର୍ବ ଓ ଅପ୍ସରାମାନେ ମଧ୍ୟ ତାଙ୍କୁ ଅତ୍ୟଧିକ ସରାହିଲେ।
वैशम्पायन उवाच