Omens in the Kuru Host and Droṇa’s Recognition of Arjuna (क्लीबवेषधारी पार्थ-परिज्ञानम्)
तमुत्तरं वीक्ष्य रथोत्तमे स्थितं बृहन्नलाया: सहितं महाभुजम् | स्त्रियश्न कन्याश्र द्विजाश्व सुव्रता: प्रदक्षिणं चक्रुरथोचुरज्ञना:,बृहन्नलाके साथ उत्तम रथपर बैठे हुए महाबाहु उत्तरको जाते देख स्त्रियों, कन्याओं तथा उत्तम व्रतका पालन करनेवाले ब्राह्मणोंने उसकी दक्षिणावर्त परिक्रमा की। तत्पश्चात् स्त्रियाँ और कन्याएँ बोलीं---
tam uttaraṁ vīkṣya rathottame sthitaṁ bṛhannalāyāḥ sahitaṁ mahābhujam | striyaś ca kanyāś ca dvijāś ca suvratāḥ pradakṣiṇaṁ cakrur athocur ajñanāḥ ||
ବୃହନ୍ନଲାଙ୍କ ସହ ଉତ୍ତମ ରଥରେ ଅବସ୍ଥିତ ମହାବାହୁ ଉତ୍ତରକୁ ଯାଉଥିବା ଦେଖି, ସ୍ତ୍ରୀମାନେ, କନ୍ୟାମାନେ ଓ ସୁବ୍ରତ ବ୍ରାହ୍ମଣମାନେ ତାଙ୍କୁ ଦକ୍ଷିଣାବର୍ତ୍ତ ପ୍ରଦକ୍ଷିଣ କଲେ। ତାପରେ ସ୍ତ୍ରୀ ଓ କନ୍ୟାମାନେ କହିଲେ—
वैशम्पायन उवाच