Virāṭa Rescued from Suśarmā; Night Battle and Royal Gratitude (विराटमोक्षणं सुशर्मवधाभिमुखं च)
तौ प्रविष्टी महासेनां बलवन्तौ मनस्विनौ । आच्छेतां बहुसंरब्धौ केशाकेशि रथारथि:,उस विशाल सेनामें घुसे हुए और अत्यन्त क़ुद्ध हुए उन बलवान् एवं मनस्वी वीरोंने उस सारी सेनाको मोहित कर दिया। वे दोनों उन त्रिगर्त सैनिकोंसे एक दूसरेके केश पकड़- पकड़कर तथा रथोंपर बैठे हुए रथियोंको गिरा-गिराकर युद्ध करने लगे
tau praviṣṭī mahāsenāṃ balavantau manasvinau | ācchetāṃ bahusaṃrabdhau keśākeśi rathārathī ||
ମହାସେନାରେ ପ୍ରବେଶ କରିଥିବା ସେଇ ବଳବାନ୍ ଓ ମନସ୍ବୀ ଦୁଇ ବୀର ଅତ୍ୟନ୍ତ କ୍ରୋଧାବେଶରେ ସମଗ୍ର ସେନାକୁ ଅସ୍ଥିର କରିଦେଲେ। ସେମାନେ କେଶାକେଶି କରି ଏବଂ ରଥରେ ବସିଥିବା ରଥୀମାନଙ୍କୁ ତଳେ ପକାଇ ପକାଇ ଯୁଦ୍ଧ କଲେ।
वैशम्पायन उवाच