त्रिगर्त-मात्स्य-संग्रामः
The Trigarta–Matsya Engagement at Twilight
स्वारूढा युद्धकुशलै: शिक्षिता हस्तिसादिभि: । राजानमन्वयु: पश्चाच्चलन्त इव पर्वता:,जिनके गण्डस्थलसे मदकी धारा बहती थी, ऐसे भयंकर मतवाले हाथी तथा सुन्दर दाँतोंवाले साठ वर्षके मदवर्षी गजराज, जिन्हें युद्धकुशल महावतोंने शिक्षा दी थी, सवारोंको अपनी पीठपर चढ़ाये राजा विराटके पीछे-पीछे इस प्रकार जा रहे थे, मानो चलते-फिरते पर्वत हों
svārūḍhā yuddhakuśalaiḥ śikṣitā hastisādibhiḥ | rājānam anvayuḥ paścāc calanta iva parvatāḥ ||
ଯୁଦ୍ଧକୁଶଳ ମହାଉତମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଶିକ୍ଷିତ, ପିଠିରେ ସବାରୀ ବହନ କରୁଥିବା ସେ ମହାହସ୍ତୀମାନେ ରାଜା ବିରାଟଙ୍କ ପଛେ ପଛେ ଚାଲିଲେ; ସେମାନେ ଚଳନ୍ତା ପର୍ବତ ପରି ଦିଶୁଥିଲେ।
वैशम्पायन उवाच