Virāṭa’s Mobilization to Recover the Cattle (गोधनरक्षणार्थ विराटस्य सैन्यसमायोजनम्)
तस्मात् क्षिप्रं विनिर्यामो योजयित्वा वरूथिनीम् | विभज्य चाप्यनीकानि यथा वा मन्यसेडनघ,“इसलिये सेनाको सुसज्जित करके उसे कई टुकड़ियोंमें बाँ.कर हमलोग शीघ्र यहाँसे कूच कर देंगे। अथवा अनघ! आपको जैसा ठीक लगे, वैसा करें
tasmāt kṣipraṁ viniryāmo yojayitvā varūthinīm | vibhajya cāpy anīkāni yathā vā manyase 'naghā ||
ଏହିପରି ସେନାକୁ ସୁସଜ୍ଜିତ କରି, ଦଳଗୁଡ଼ିକୁ ବିଭାଗ କରି, ଆମେ ଶୀଘ୍ର ଏଠାରୁ କୁଚ କରିବୁ। ନଚେତ୍, ହେ ଅନଘ, ଆପଣଙ୍କୁ ଯାହା ଯଥୋଚିତ ଲାଗେ, ସେହିପରି କରାଯାଉ।
वैशम्पायन उवाच