द्रौपद्याः शोकवचनम्
Draupadī’s Lament and Indictment of Misfortune
गात्राणि वाससी चैव प्रक्षाल्य सलिलेन सा | चिन्तयामास रुदती तस्य दुःखस्य निर्णयम्,वह अपने निवासस्थानपर गयी। उस समय सूक्ष्म कटिभागवाली ट्रुपदकुमारी कृष्णाने वहाँ यथायोग्य शौच-स्नान करके जलसे अपने शरीर और वस्त्र धोये तथा वह रोती हुई उस दुःखके निवारणका उपाय सोचने लगी--
gātrāṇi vāsasī caiva prakṣālya salilena sā | cintayāmāsa rudatī tasya duḥkhasya nirṇayam ||
ସେ ଜଳରେ ନିଜ ଅଙ୍ଗପ୍ରତ୍ୟଙ୍ଗ ଓ ବସ୍ତ୍ର ଧୋଇ, କାନ୍ଦୁଥିବା ଅବସ୍ଥାରେ ସେଇ ଦୁଃଖର ନିଷ୍ପତ୍ତି—ଅର୍ଥାତ୍ ନିବାରଣ—ଉପାୟ ଚିନ୍ତା କଲା।
वैशम्पायन उवाच