सूर्य–कर्णोपदेशः
Sūrya’s Counsel to Karṇa on Kīrti and the Kuṇḍala
कृष्णानां मुखपुण्ड्राणामृक्षाणां भीमकर्मणाम् | कोटीशतसहस्रेण जाम्बवानू् प्रत्यदृश्यत,जिनके मुख (ललाट)-पर तिलकका चिह्न शोभा पा रहा था तथा जो भयंकर पराक्रम करनेवाले थे, ऐसे काले रंगके शतकोटि सहस्र (दस खरब) रीछोंकी सेनाके साथ वहाँ जाम्बवान् दिखायी दिये
ମାର୍କଣ୍ଡେୟ କହିଲେ—କଳାବର୍ଣ୍ଣ, ଲଲାଟରେ ତିଳକ-ଚିହ୍ନରେ ଶୋଭିତ, ଭୀମ କର୍ମ କରୁଥିବା ଋକ୍ଷମାନଙ୍କର ଶତଶତ କୋଟି-ସହସ୍ର ସେନା ସହିତ ସେଠାରେ ଜାମ୍ବବାନ୍ ପ୍ରତ୍ୟକ୍ଷ ହେଲେ।
मार्कण्डेय उवाच