अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
ततोअनुव्रज्य गोविन्द धर्मराजो युधिष्ठिर: । राज्ञां सकाशे द्युतिमानुवाचेदं वचस्तदा,इस प्रकार गोविन्दके पीछे कुछ दूर जाकर तेजस्वी धर्मराज युधिष्ठिरने राजाओंके समीप उनसे कुछ कहनेका विचार किया
tato 'nuvrajya govindaṃ dharmarājo yudhiṣṭhiraḥ | rājñāṃ sakāśe dyutimān uvācedaṃ vacas tadā ||
ତାପରେ ଗୋବିନ୍ଦଙ୍କୁ କିଛି ଦୂର ଅନୁସରଣ କରି ଦ୍ୟୁତିମାନ ଧର୍ମରାଜ ଯୁଧିଷ୍ଠିର ରାଜାମାନଙ୍କ ସମୀପରେ ସେତେବେଳେ ଏହି ବଚନ କହିଲେ।
वैशम्पायन उवाच