Ulūka’s Provocation and Keśava’s Counter-Message (उलूकदूत्ये केशवप्रत्युत्तरम्)
मार्जार: किल दुष्टात्मा निश्रेष्ट: सर्वकर्मसु । ऊर्ध्वबाहुः स्थितो राजन् गड्भातीरे कदाचन,“राजन! यह प्रसिद्ध है कि किसी समय एक दुष्ट बिलाव दोनों भुजाएँ ऊपर किये गंगाजीके तटपर खड़ा रहा। वह किसी भी कार्यके लिये तनिक भी चेष्टा नहीं करता था
mārjāraḥ kila duṣṭātmā niśreṣṭhaḥ sarvakarmasu | ūrdhvabāhuḥ sthito rājan gaṅgātīre kadācana ||
ରାଜନ୍! ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଯେ କେବେ ଗୋଟିଏ ଦୁଷ୍ଟାତ୍ମା ବିଲେଇ, ସମସ୍ତ କର୍ମରେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ନୀଚ, ଗଙ୍ଗାତୀରେ ଦୁଇ ଭୁଜା ଉପରେ ଉଠାଇ ଦାଁଡ଼ିଥିଲା।
संजय उवाच