दक्षिणा-दिक्, पितृपक्ष-प्रतिष्ठा, तथा कर्मगतिः — Suparṇa’s Cosmographic Instruction
द्विजश्रेष्ठ गालव! बोलो, मैं पूर्व, दक्षिण, पश्चिम अथवा उत्तरमेंसे किस दिशाकी ओर चलूँ? २ ।। यस्यामुदयते पूर्व सर्वलोकप्र भावन: । सविता यत्र संध्यायां साध्यानां वर्तते तप:
ଯେ ଦିଗରେ ସମସ୍ତ ଲୋକକୁ ପ୍ରଭାବିତ କରୁଥିବା ସବିତା ଉଦୟ ହୁଅନ୍ତି, ଏବଂ ସନ୍ଧ୍ୟାକାଳେ ସାଧ୍ୟଗଣ ଯେଉଁଠାରେ ତପସ୍ୟାରେ ରତ ରହନ୍ତି—
युपर्ण उवाच