रसातल-वर्णनम्
Rasātala Description: Surabhi, Phenapāḥ, and the Directional Cows
वैनतेयसुतै: सूत षड्भिस्ततमिदं कुलम् | सुमुखेन सुनाम्ना च सुनेत्रेण सुवर्चसा,देवसारथि मातले! यहाँ विनतानन्दन गरुड़के छ: पुत्रोंने अपनी वंशपरम्पराका विस्तार किया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं--सुमुख, सुनामा, सुनेत्र, सुवर्चा, सुरुच तथा पक्षिराज सुबल। विनताके वंशकी वृद्धि करनेवाले, कश्यपकुलमें उत्पन्न हुए तथा ऐश्वर्यका विस्तार करनेवाले इन छहों पश्षियोंने गरुड़-जातिकी सैकड़ों और सहस्रों शाखाओंका विस्तार किया है
nārada uvāca |
vainateya-sutaiḥ sūta ṣaḍbhis tatam idaṃ kulam |
sumukhena sunāmnā ca sunetreṇa suvarcasā |
surucā ca subalena pakṣirājena vistṛtam ||
ନାରଦ କହିଲେ—ହେ ସୂତ! ବୈନତେୟ (ଗରୁଡ)ଙ୍କ ଛଅ ପୁତ୍ର ଏହି କୁଳକୁ ବିସ୍ତାର ଓ ବର୍ଧିତ କରିଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କ ନାମ—ସୁମୁଖ, ସୁନାମା, ସୁନେତ୍ର, ସୁବର୍ଚ୍ଚା, ସୁରୁଚ ଏବଂ ପକ୍ଷିରାଜ ସୁବଳ। କଶ୍ୟପକୁଳରେ ଜନ୍ମିତ, ବିନତାବଂଶବର୍ଧକ ଏହି ଶ୍ରେଷ୍ଠମାନେ ଗରୁଡଜାତିକୁ ଶତ-ସହସ୍ର ଶାଖାରେ ପ୍ରସାରିତ କରି କୁଳସମୃଦ୍ଧି ପ୍ରକାଶ କରିଛନ୍ତି।
नारद उवाच