स्त्री-विलापः — गान्धार्याः रणभूमिदर्शनं शापवचनं च
Battlefield Lament and Gāndhārī’s Curse
गान्धायुवाच पाण्डवा धार्रराष्ट्राश्न दग्धा: कृष्ण परस्परम् । उपेक्षिता विनश्यन्तस्त्वया कस्माज्जनार्दन,गान्धारीने कहा--श्रीकृष्ण! जनार्दन! पाण्डव और धृतराष्ट्रके पुत्र आपसमें लड़कर भस्म हो गये। तुमने इन्हें नष्ट होते देखकर भी इनकी उपेक्षा कैसे कर दी?
ଗାନ୍ଧାରୀ କହିଲେ— “ହେ କୃଷ୍ଣ! ହେ ଜନାର୍ଦନ! ପାଣ୍ଡବ ଓ ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ରଙ୍କ ପୁତ୍ରମାନେ ପରସ୍ପର ଯୁଦ୍ଧ କରି ଭସ୍ମୀଭୂତ ହେଲେ। ସେମାନେ ନଶିଯାଉଥିବାବେଳେ ତୁମେ କାହିଁକି ସେମାନଙ୍କୁ ଉପେକ୍ଷା କଲ?”
वैशम्पायन उवाच