स्त्रीपर्व १: धृतराष्ट्रशोकः संजयाश्वासनं च
Strī Parva 1: Dhṛtarāṣṭra’s Lament and Saṃjaya’s Consolation
वैशमग्पायन उवाच तस्य लालप्यमानस्य बहुशोकं वितन्वतः । शोकापहां नरेन्द्रस्य संजयो वाक्यमब्रवीत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! इस प्रकार राजा धृतराष्ट्र जब बहुत शोक प्रकट करते हुए बारंबार विलाप करने लगे, तब संजयने उनके शोकका निवारण करनेके लिये यह बात कही--
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ—ରାଜନ୍! ଏହିପରି ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ର ରାଜା ଅତ୍ୟଧିକ ଶୋକ ପ୍ରକାଶ କରି ପୁନଃପୁନଃ ବିଲାପ କରୁଥିବାବେଳେ, ତାଙ୍କ ଶୋକ ନିବାରଣ ପାଇଁ ସଞ୍ଜୟ ଏହି କଥା କହିଲେ।
वैशमग्पायन उवाच